यूकेडी के द्वारा प्रेस वार्ता में पत्थर पुनर्विकास योजना पर उठे गंभीर सवाल, पारदर्शिता और जनहित की मांग

  • यूकेडी के द्वारा प्रेस वार्ता में पत्थर पुनर्विकास योजना पर उठे गंभीर सवाल, पारदर्शिता और जनहित की मांग
    विकासनगर,
    देहरादून उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) द्वारा डाकपत्थर पुनर्विकास योजना को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इस दौरान पार्टी पदाधिकारियों ने प्रस्तावित रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट पर गंभीर सवाल उठाते हुए सरकार से पारदर्शिता और जनहित में स्पष्ट जवाब देने की मांग की।
    हरीश कुनियाल, मीडिया प्रभारी पछुवादून
    उन्होंने प्रेस वार्ता की शुरुआत करते हुए कहा कि डाकपत्थर क्षेत्र में प्रस्तावित रिडेवलपमेंट योजना केवल एक विकास परियोजना नहीं, बल्कि हजारों लोगों के घर, रोजगार और भविष्य से जुड़ा संवेदनशील विषय है।
    उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रोजेक्ट में स्थानीय जनता को न तो विश्वास में लिया गया है और न ही उनके पुनर्वास को लेकर कोई स्पष्ट नीति सामने रखी गई है।
    उन्होंने आरोप लगाया कि बिना जनसहमति और स्पष्ट योजना के इस तरह का प्रोजेक्ट लागू करना जनहित के खिलाफ है।
    दूसरे वक्ता गणेश प्रसाद काला, संगठन महामंत्री
    उन्होंने डाकपत्थर पुनर्विकास योजना के मास्टर प्लान का विस्तार से विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए बताया कि लगभग 224 एकड़ सरकारी भूमि को एक “मॉडर्न सिटी” के रूप में विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।
    उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत—
    रेजिडेंशियल ज़ोन में नई कॉलोनियां और बहुमंजिला भवन बनाए जाएंगे
    कमर्शियल ज़ोन में बड़े कॉम्प्लेक्स, ऑफिस और व्यापारिक गतिविधियां होंगी
    इंस्टिट्यूशनल ज़ोन में स्कूल और अस्पताल प्रस्तावित हैं
    साथ ही होटल, पार्क, कम्युनिटी स्पेस और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर भी विकसित किया जाएगा
    उन्होंने गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि:
    इस पूरे प्लान में वर्तमान में रह रहे लोगों के पुनर्वास का कोई जिक्र नहीं है
    यह स्पष्ट नहीं है कि मौजूदा स्कूल और अस्पतालों का क्या होगा
    प्रोजेक्ट में प्राइवेट कंपनियों की भागीदारी और मुनाफे का मॉडल प्रमुख रूप से दिखाई देता है
    उन्होंने कहा कि लगभग ₹1000 करोड़ के इस प्रोजेक्ट में ₹700 करोड़ मुनाफे का अनुमान दर्शाता है कि यह केवल विकास नहीं बल्कि सरकारी जमीन के व्यवसायीकरण की ओर इशारा करता है।
    उन्होंने सवाल उठाया कि—
    क्या सरकार जमीन देगी और प्राइवेट कंपनियां मुनाफा कमाएंगी?
    और इस पूरी प्रक्रिया में स्थानीय जनता का क्या होगा?

जितेंद्र पंवार, अध्यक्ष पछुवादून यूकेडी
उन्होंने कहा कि डाकपत्थर को “स्मार्ट सिटी” बनाने के नाम पर यहां के मूल निवासियों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि किसी भी प्रकार का कार्य शुरू करने से पहले जनता को विश्वास में लिया जाए और उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
मुख्य सवाल जो उठाए गए:
क्या भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के अनुसार हो रही है?
क्या एक ही अधिकारी के पास कई महत्वपूर्ण पद होने से हितों का टकराव उत्पन्न हो रहा है?
क्या इस प्रोजेक्ट का स्वतंत्र मूल्यांकन कराया गया है?
क्या स्थानीय लोगों, कर्मचारियों, स्कूलों और अस्पतालों के हित सुरक्षित हैं?
यूकेडी की प्रमुख मांगें:
पूरे प्रोजेक्ट की स्वतंत्र जांच कराई जाए
सभी दस्तावेज और निर्णय प्रक्रिया सार्वजनिक की जाए
प्रभावित लोगों के लिए स्पष्ट पुनर्वास नीति बनाई जाए
जनहित को प्राथमिकता देते हुए पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए
आंदोलन की घोषणा:
यूकेडी द्वारा इस मुद्दे पर जनआंदोलन को आगे बढ़ाते हुए मशाल जुलूस निकालने की घोषणा की गई है—
सभी क्षेत्रवासियों और जनसंगठनों से इस मशाल जुलूस में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की गई है।
इस अवसर पर उपस्थित:
केंद्रीय संगठन मंत्री प्रकाश भट्ट,
सुरेंद्र कुकरेती  ठेकेदार,
सौरव उनियाल (ब्लॉक अध्यक्ष, विकासनगर),
अरविंद तोमर (कार्यकारी नगर अध्यक्ष, विकासनगर) सहित अन्य कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी मौजूद रहे।

यूकेडी ने स्पष्ट रूप से कहा कि—
“पूरा मास्टर प्लान तैयार है—जमीन, पैसा और मुनाफा तय है, लेकिन जनता का भविष्य अब भी अधर में है।”
पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही इस विषय पर पारदर्शिता नहीं दिखाई, तो मशाल जलाकर व्यापक जन आंदोलन किया जाएगा।

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