देहरादून में ‘बुलडोजर’ के बाद फिर निर्माण! आखिर किसके भरोसे पर?
देहरादून | ईस्ट होप टाउन
देहरादून के ईस्ट होप टाउन में जमीन को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन की कार्रवाई और उसकी निगरानी दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला खाता नंबर 694 और खसरा नंबर 858 की भूमि से जुड़ा बताया जा रहा है।
आरोप है कि इस जमीन पर निर्माण कार्य को लेकर प्रशासन पहले भी कार्रवाई कर चुका है। जुलाई से अगस्त के बीच कथित अवैध निर्माण को तीन बार ध्वस्त कराया गया, लेकिन अब तस्वीरें बता रही हैं कि उसी स्थान पर एक बार फिर निर्माण के लिए पिलर खड़े कर दिए गए हैं।
यानी सवाल सीधा है—
तीन बार बुलडोजर चला… फिर भी चौथी बार निर्माण कैसे शुरू हो गया?
भूमि मालिक का दावा है कि जमीन को लेकर मामला न्यायालय में विचाराधीन है और कोर्ट का स्टे भी है। ऐसे में यदि न्यायालय का आदेश निर्माण पर रोक लगाता है तो उसका पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है।
गोल्डन फॉरेस्ट से जुड़ी जमीनों का विवाद देहरादून में लंबे समय से न्यायालय और राजस्व मामलों में रहा है। सरकारी और न्यायिक रिकॉर्ड में ईस्ट होप टाउन सहित कई क्षेत्रों की जमीनों का उल्लेख मिलता है।
हाल के वर्षों में भी गोल्डन फॉरेस्ट से जुड़ी जमीनों की बिक्री और कथित फर्जीवाड़े के मामलों में पुलिस कार्रवाई की खबरें सामने आती रही हैं।
अब प्रशासन से पांच सवाल
पहला— खसरा नंबर 858 की वर्तमान राजस्व स्थिति क्या है?
दूसरा— क्या इस भूमि पर न्यायालय का स्टे प्रभावी है?
तीसरा— यदि स्टे या प्रशासनिक रोक है तो निर्माण दोबारा कैसे शुरू हुआ?
चौथा— तीन बार ध्वस्तीकरण के बाद भी निर्माण कराने वालों पर क्या कार्रवाई हुई?
पांचवां— क्या प्रशासन मौके पर स्थायी निगरानी की व्यवस्था करेगा?
‘पहाड़ से मैदान तक’ का सवाल साफ है—
अगर कार्रवाई के बाद भी उसी जमीन पर बार-बार निर्माण होता रहेगा, तो आखिर कानून का डर किसे रहेगा?
प्रशासन को इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर राजस्व रिकॉर्ड, न्यायालय के आदेश और मौके की स्थिति को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए।
देहरादून में ‘बुलडोजर’ के बाद फिर निर्माण! आखिर किसके भरोसे पर?
