हस्तकला को मिला नया मंच: विकासनगर में पीएम विश्वकर्मा योजना का भव्य मेला, कारीगरों की हुई अच्छी कमाई
13 जिलों के कारीगर शामिल, हाथ से बने उत्पादों की जबरदस्त डिमांड
विकासनगर, देहरादून:
जहां एक ओर पारंपरिक हस्तकला का व्यवसाय धीरे-धीरे कम होता जा रहा है, वहीं प्रधानमंत्री की पीएम विश्वकर्मा योजना कारीगरों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई है। इसी कड़ी में एमएसएमई विकास कार्यालय देहरादून द्वारा विकासनगर के राजकीय आईटीआई कॉलेज ग्राउंड में दो दिवसीय प्रदर्शनी एवं व्यापार मेले का आयोजन किया गया।
इस मेले में प्रदेश के 13 जिलों से आए विश्वकर्माओं ने अपने हुनर का प्रदर्शन किया और अपने उत्पादों की बिक्री भी की। मेले में लगे स्टॉल पर स्थानीय लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली, जिससे कारीगरों को अच्छा लाभ प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम के सफल संचालन में आईटीआई इंस्ट्रक्टर के. आर जोशी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं एमएसएमई के वरिष्ठ अधिकारियों—डॉ. सुनील निवेरा, अमित मोहन और सुभाष चंद्र कांडपाल—ने भी कार्यक्रम में भाग लेकर कारीगरों का उत्साहवर्धन किया।वही इस कार्यक्रम में प्रथम दिवस मुख्य अतिथि के रूप में एसडीएम विकास नगर विनोद कुमार जो कि किसी कारणवश कार्यक्रम में नहीं पहुंच पाए तथा नगर पालिका विकास नगर अध्यक्ष बॉबी नौटियाल को स्मृति चिन्ह व हरित अभिनंदन किया कार्यक्रम के दूसरे दिन मुख्य अतिथि वीरेंद्र सिंह आईटीआई विकास नगर प्रधानाचार्य तथा बद्रीश प्रसाद नगर पालिका अधिशासी अधिकारी को स्मृति चिन्ह व हरित अभिनंदन किया गया तथा मीडिया से पहुंचे सविता रानी प्रधान संपादक पहाड़ से मैदान तक, राजेश कुमार प्रधान संपादक पहाड़ जन समाचार पत्र, महेंद्र तोमर एवं तबरेज खान को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया
मेले में विशेष रूप से हाथ से बनी घास की टोकरियां, डिब्बे, पेंटिंग दीवार पर टांगने के हैंगिंग और अन्य पारंपरिक वेशभूषा, टेडी बेयर, बांस से बना हुआ सामान आदि उत्पादों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। इन उत्पादों की बिक्री के साथ-साथ उनका व्यापक प्रचार-प्रसार भी हुआ।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। अधिकारियों ने बताया कि ऐसे आयोजन न केवल कारीगरों को आर्थिक मजबूती देते हैं, बल्कि भारत की पारंपरिक कला और संस्कृति को भी जीवित रखने में मददगार साबित हो रहे हैं।
