आयुष प्रदेश में आयुष डॉक्टरों की उपेक्षा और शोषण, सरकार से समानता और सम्मान की मांग
देहरादून। उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न आयुष प्रदेशों में कार्यरत आयुष चिकित्सक लंबे समय से वेतन असमानता, पदोन्नति में देरी, संविदा प्रथा और प्रशासनिक उपेक्षा जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। यह बात राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ, उत्तराखंड के स्टेट मीडिया कोऑर्डिनेटर डॉ. (प्रो.) डी. सी. पसबोला ने कही।
डॉ. पसबोला ने बताया कि आयुष चिकित्सक एलोपैथिक डॉक्टरों की तरह समान जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं, लेकिन उन्हें वेतन, भत्तों और अन्य सुविधाओं में बराबरी नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि कई चिकित्सक वर्षों से संविदा और अल्प मानदेय पर कार्य कर रहे हैं, जिससे उनके भविष्य और नौकरी की सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की डीएसीपी (DACP) योजना के बावजूद राज्यों में पदोन्नति और एसीपी/एमएसीपी लाभों के मामलों का वर्षों से निस्तारण नहीं हो पाया है। इसके अलावा पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में इंटरनेट एवं तकनीकी सुविधाओं के अभाव के बावजूद बायोमेट्रिक और मोबाइल ऐप आधारित उपस्थिति अनिवार्य करना चिकित्सकों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव बना रहा है।
डॉ. पसबोला ने कहा कि स्वास्थ्य नीतियों और बजट में आयुष चिकित्सा प्रणाली को अपेक्षित महत्व नहीं मिलने के कारण आयुष सेवाओं का विकास प्रभावित हो रहा है। अपनी मांगों को लेकर आयुष चिकित्सकों को समय-समय पर विरोध प्रदर्शन, काली पट्टी बांधकर कार्य करने तथा आंदोलन का सहारा लेना पड़ता है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि आयुष चिकित्सकों को समान वेतन और भत्ते प्रदान किए जाएं, संविदा व्यवस्था समाप्त कर नियमित नियुक्तियां की जाएं तथा लंबित डीएसीपी और एसीपी लाभों को शीघ्र लागू किया जाए। साथ ही दुर्गम क्षेत्रों के लिए व्यवहारिक डिजिटल उपस्थिति नीति बनाई जाए और आयुष चिकित्सकों के अधिकारों एवं कार्यक्षेत्र को लेकर स्पष्ट नीति निर्धारित की जाए।
