यमुना घाट विवाद में नया मोड़: “मूर्ति का विरोध नहीं, पुराने पिलर पर जबरन स्थापना का विरोध”—रामशरण नौटियाल
तीन बीघा जमीन दान होने के बावजूद 10×10 फीट जगह नहीं मिलने पर उठाए सवाल, शाम-झूला पुल को बताया यात्री सुरक्षा के लिए जरूरी
झूठे कथा कथित आरोपो को लेकर
रामशरण नौटियालन ने की प्रेस वार्ता
विकासनगर। यमुना घाट पर यमुना माता की मूर्ति स्थापना को लेकर चल रहे विवाद के बीच पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामशरण नौटियाल ने एक बार फिर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि उनका विरोध यमुना माता की मूर्ति से नहीं है, बल्कि पुराने पिलर और प्रस्तावित शाम-झूला स्थल पर जबरन मूर्ति स्थापित किए जाने को लेकर है।
नौटियाल के अनुसार नमामि गंगे के तहत विकसित यमुना घाट के रखरखाव के लिए लोक पंचायत से जुड़े लोगों को क्षेत्रवासियों द्वारा करीब तीन बीघा जमीन दान किए जाने की बात सामने आई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब घाट के रखरखाव और अन्य गतिविधियों के लिए इतनी जमीन उपलब्ध कराई गई है तो यमुना माता की मूर्ति के लिए केवल 10×10 फीट जमीन क्यों नहीं उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने कहा कि मूर्ति के लिए अलग और उपयुक्त स्थान तलाशने में किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उनका कहना है कि धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए मूर्ति स्थापित की जाए, लेकिन इसके लिए पुराने पिलर या ऐतिहासिक स्थल को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।
पुराने पिलर को बताया जौनसार-बावर की धरोहर जिस पर श्याम झूला का निर्माण होना है ।
रामशरण नौटियाल ने कहा कि जिस पुराने पिलर को लेकर विवाद है, वह क्षेत्र की पुरानी पहचान और धरोहर से जुड़ा हुआ है। इसलिए वहां किसी भी प्रकार का बदलाव करने से पहले उसके ऐतिहासिक और तकनीकी महत्व को समझना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि जौनसार-बावर के लोग चाहते हैं कि इसी क्षेत्र में शाम-झूला पुल विकसित किया जाए, जिससे भविष्य में क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आवागमन में सुविधा मिल सके।
जो की“हाईवे जाम होता है, कभी भी हो सकता है हादसा”
नौटियाल ने कहा कि बाहर से आने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ने पर हाईवे पर जाम की स्थिति बनती है। यदि यात्रियों के लिए पैदल चलने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होगी तो दुर्घटना की आशंका बनी रहेगी।
उन्होंने कहा कि किसी भी विकास कार्य को केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं बल्कि यात्री सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर देखा जाना चाहिए।
उनका कहना है कि शाम-झूला पुल बनने से यात्रियों को सुरक्षित आवागमन का विकल्प मिलेगा और क्षेत्र के पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है।
₹22 लाख की मूर्ति पर मांगा पूरा हिसाब
प्रेस वार्ता में नौटियाल ने कथित तौर पर 22 लाख रुपये की लागत वाली यमुना माता की मूर्ति को लेकर भी पारदर्शिता की मांग की।
उन्होंने कहा कि यदि मूर्ति की लागत 22 लाख रुपये है तो इसका पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए। मूर्ति किससे बनवाई गई, इसकी वास्तविक लागत कितनी है और धनराशि किस-किस व्यक्ति अथवा संस्था से प्राप्त हुई—इन सभी सवालों का जवाब जनता के सामने होना चाहिए। इन सब का सार्वजनिक होना जरूरी है क्योंकि यह जनताका पैसा है
उन्होंने चंदे और भविष्य में मूर्ति स्थल पर आने वाले चढ़ावे के लेखे-जोखे को लेकर भी पारदर्शिता की मांग की।
जौनसार-बावर में महिलाओं से जुड़े कथित दुष्कर्म मामलों पर उठाए सवाल
रामशरण नौटियाल ने जौनसार-बावर क्षेत्र में अनुसूचित जाति की महिलाओं से जुड़े कथित दुष्कर्म मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि सामाजिक संस्थाएं समाज हित की बात करती हैं तो उन्हें महिलाओं के खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों के मामलों में भी आवाज उठानी चाहिए।
उन्होंने कथित मामलों में कार्रवाई और पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में सामाजिक संस्थाओं की भूमिका पर सवाल उठाया। और इसका स्पष्टीकरण भी होना
इन मामलों में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित पुलिस-प्रशासन और दूसरे पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आना आवश्यक है।
“यमुना घाट किसी की निजी संपत्ति नहीं”
नौटियाल ने कहा कि यमुना घाट जनता की आस्था का केंद्र है। यहां जौनसार-बावर ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्रों और बाहर से आने वाले श्रद्धालु भी पहुंचेंगे।
उन्होंने कहा कि यह किसी व्यक्ति अथवा संस्था की निजी संपत्ति नहीं है। यदि भूमि सरकारी है तो उस पर किसी संस्था अथवा व्यक्ति का निजी अधिकार नहीं हो सकता।
उन्होंने सरकार द्वारा प्रदेश में मंदिर, मस्जिद अथवा अन्य स्थानों पर अवैध कब्जों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि यमुना घाट के मामले में भी भूमि और निर्माण से संबंधित सभी दस्तावेज तथा अनुमतियां सार्वजनिक होनी चाहिए।
“आस्था भी रहे, धरोहर भी बचे और जनता को सुविधा भी मिले”
रामशरण नौटियाल ने कहा कि विवाद का समाधान टकराव से नहीं बल्कि बातचीत और जनहित के आधार पर होना चाहिए। उनका कहना है कि यमुना माता की मूर्ति भी सम्मानपूर्वक स्थापित हो, पुरानी धरोहर भी सुरक्षित रहे और शाम-झूला पुल के माध्यम से क्षेत्र की जनता तथा यात्रियों को बेहतर सुविधा मिले—इसी दिशा में सभी पक्षों को काम करना चाहिए।
