₹800 मानदेय में परिवार का खर्च कैसे चले? लोक कलाकारों का फूटा गुस्सा, संस्कृति विभाग के खिलाफ प्रदर्शन
देहरादून। लोक कलाकार संरक्षण संघ-उत्तराखंड के बैनर तले लोक कलाकारों ने संस्कृति विभाग की नीतियों और कलाकारों की समस्याओं को लेकर धरना-प्रदर्शन किया। कलाकारों ने मुख्यमंत्री के आदेशों की कथित अवहेलना और विभागीय स्तर पर कलाकारों की उपेक्षा किए जाने के आरोप लगाते हुए अपनी नाराजगी जताई।
प्रदर्शन के दौरान कलाकारों ने मानदेय की राशि और उसके भुगतान में कथित अनियमितता का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। कलाकारों का कहना है कि उन्हें महज ₹800 मानदेय मिलता है। ऐसे में आज के समय में इस राशि से परिवार का खर्च, किराया, आने-जाने का किराया-भाड़ा और अन्य जरूरी खर्च पूरे करना उनके लिए बेहद मुश्किल है।
कलाकारों का सवाल है कि ₹800 के मानदेय में आखिर परिवार का खर्च कैसे पूरा किया जाए? उनका कहना है कि कई बार मानदेय समय पर नहीं मिलता और कभी मिलता है तो कभी भुगतान में देरी होती है। इससे लोक कलाकारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है।
धरने में शामिल कलाकारों ने कहा कि लोक संस्कृति और पारंपरिक कला को बचाने में लोक कलाकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन आर्थिक रूप से उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने कलाकारों के सम्मानजनक मानदेय, समय पर भुगतान और कलाकारों के हित में प्रभावी व्यवस्था किए जाने की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान कलाकारों के हाथों में “लोक कलाकारों का शोषण बंद करो”, “संस्कृति विभाग मुर्दाबाद” जैसे नारे लिखी तख्तियां भी नजर आईं। कलाकारों ने अपनी समस्याओं के समाधान के लिए शासन स्तर पर ठोस कार्रवाई की मांग की।
लोक कलाकार संरक्षण संघ-उत्तराखंड की ओर से यह भी कहा गया कि उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है।
₹800 मानदेय में परिवार का खर्च कैसे चले? लोक कलाकारों का फूटा गुस्सा, संस्कृति विभाग के खिलाफ प्रदर्शन
