ऐतिहासिक धरोहर पर मंडराया संकट, हरिपुर में पहरे पर बैठे रामशरण नौटियाल; 1872 के पुल के स्तंभ को बचाने की उठाई मांग विकासनगर/हरिपुर।

ऐतिहासिक धरोहर पर मंडराया संकट, हरिपुर में पहरे पर बैठे रामशरण नौटियाल; 1872 के पुल के स्तंभ को बचाने की उठाई मांग
विकासनगर/हरिपुर।
जौनसार-बाबर की ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता रामशरण नौटियाल रात हरिपुर पहुंचे और वर्ष 1872 में बने ऐतिहासिक पुल के स्तंभ की सुरक्षा को लेकर धरने पर बैठ गए।
रामशरण नौटियाल का कहना है कि जहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा यमुना घाट का शिलान्यास किया गया था, वहां निर्माण कार्य लगभग पूरा होने की स्थिति में है। भविष्य में यह क्षेत्र श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बनेगा। वर्तमान में पास से राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरता है, जहां लगातार वाहनों की आवाजाही रहती है। ऐसे में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या से यातायात प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि पुराने ऐतिहासिक पुल के मजबूत स्तंभ का संरक्षण करते हुए उसी पर झूला पुल बनाया जाए, जिससे श्रद्धालुओं को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके। उन्होंने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री से भी चर्चा की जा चुकी है और प्रस्तावित झूला पुल का नाम “श्याम झूला” रखने का सुझाव दिया गया है।
रामशरण नौटियाल के अनुसार उन्हें सूचना मिली थी कि ऐतिहासिक स्तंभ पर बिना अनुमति यमुना माता की मूर्ति स्थापित करने की तैयारी चल रही है। सूचना मिलते ही उन्होंने जिलाधिकारी, मुख्यमंत्री कार्यालय तथा एसडीएम को अवगत कराया और स्वयं हरिपुर पहुंचकर रातभर पहरेदारी की।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1872 में बना यह पुल क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान है। इसे मजदूरों द्वारा तोड़ने के प्रयासों और विस्फोट जैसी परिस्थितियों में भी नुकसान नहीं पहुंचा। इसलिए इस धरोहर को नष्ट करने के बजाय संरक्षित किया जाना चाहिए।
बाद में मौके पर पहुंचीं तहसीलदार ने उन्हें आश्वस्त किया कि पूरे मामले में नियमानुसार और वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन के आश्वासन के बाद रामशरण नौटियाल ने अपना धरना समाप्त कर दिया।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पुराने स्तंभ पर झूला पुल बनाया जाएगा या नहीं, लेकिन ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण को लेकर शुरू हुई यह पहल क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।