उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट: कई जिलों में तेज वर्षा और भूस्खलन की आशंका, प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी

देहरादून, 6 अगस्त। उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के कई पर्वतीय और मैदानी जिलों में अगले 24 से 48 घंटों के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग के अनुसार देहरादून, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, टिहरी गढ़वाल, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और पौड़ी गढ़वाल सहित कई जिलों में तेज बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाएं चल सकती हैं। लगातार हो रही बारिश को देखते हुए राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं।

बारिश की चेतावनी के बाद राज्य आपदा प्रबंधन विभाग, पुलिस, लोक निर्माण विभाग (PWD) और राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। पर्वतीय इलाकों में भूस्खलन, चट्टानें गिरने और सड़कों पर मलबा आने की आशंका को देखते हुए मशीनों और राहत दलों को पहले से ही तैनात किया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।

प्रशासन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम की ताज़ा जानकारी प्राप्त करने के बाद ही सफर करें। विशेष रूप से चारधाम यात्रा मार्गों पर यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं को मौसम विभाग की सलाह का पालन करने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का अनुपालन करने के लिए कहा गया है। यदि किसी मार्ग पर भूस्खलन या सड़क बंद होने की स्थिति बनती है तो यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रुकने और प्रशासन के निर्देशों का इंतजार करने की सलाह दी गई है।

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि लगातार वर्षा के कारण छोटी नदियों और बरसाती नालों का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है। ऐसे में लोगों को नदी-नालों के किनारे जाने, तेज बहाव वाले क्षेत्रों में फोटो या वीडियो बनाने तथा जोखिम भरे स्थानों पर रुकने से बचना चाहिए। बिजली चमकने और गरज के दौरान खुले मैदानों, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की भी सलाह दी गई है।

राज्य के कई जिलों में प्रशासन ने आपदा नियंत्रण कक्षों को 24 घंटे सक्रिय रखने के निर्देश दिए हैं। राहत एवं बचाव दलों को आवश्यक उपकरणों के साथ तैयार रखा गया है, जबकि स्वास्थ्य विभाग को भी संभावित आपात स्थितियों से निपटने के लिए सतर्क रहने को कहा गया है। इसके अलावा लोक निर्माण विभाग और सीमा सड़क संगठन (BRO) को प्रमुख मार्गों पर लगातार निगरानी रखने और मलबा हटाने के लिए आवश्यक मशीनरी उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के इस दौर में पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदल सकता है। इसलिए नागरिकों और पर्यटकों को केवल आधिकारिक मौसम बुलेटिन और प्रशासन द्वारा जारी सूचनाओं पर ही भरोसा करना चाहिए। किसी भी आपात स्थिति में तुरंत स्थानीय प्रशासन, पुलिस या आपदा नियंत्रण कक्ष से संपर्क करें और अफवाहों से बचें। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षा एवं राहत उपाय लागू किए जाएंगे।

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