पट्टे बंद, फिर भी खनन चालू! विकासनगर में बेखौफ दौड़ रहे ट्रैक्टर और डंपर

विकासनगर। पछवादून क्षेत्र में खनन गतिविधियों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अज्ञात सूत्रों के अनुसार स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि जिन क्षेत्रों में खनन पट्टों के संचालन को लेकर रोक या प्रतिबंध की स्थिति है, वहां भी कथित तौर पर खनिज निकासी और परिवहन का खेल जारी है।
आरोप है कि विकासनगर के नंबर-1 पुल, नंबर-2 पुल, डाकपत्थर, बाढ़वाला और जीवनगढ़ मार्ग पर बिना नंबर प्लेट के ट्रैक्टरों की आवाजाही लगातार दिखाई दे रही है। इन वाहनों के माध्यम से कथित रूप से उपखनिज का परिवहन किए जाने को लेकर स्थानीय लोगों में चर्चा है।
मामला इसलिए भी गंभीर बताया जा रहा है क्योंकि खनन से मिलने वाला राजस्व सरकार की आय का महत्वपूर्ण स्रोत है। यदि बिना वैध अनुमति के खनिज का उत्खनन अथवा परिवहन हो रहा है तो इससे सरकार को राजस्व की क्षति होने की आशंका है।
अज्ञात सूत्रों से यह भी ज्ञात हुआ कि स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि अक्टूबर में जिन खनन पट्टों के खुलने की बात कही जा रही है, वहां अभी से खनिज निकासी की जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर संबंधित क्षेत्रों में खनिज की निकासी और परिवहन किसकी अनुमति से हो रहा है?
विकासनगर और पछवादून में खनन माफिया के अवैध खनन को लेकर पहले भी कार्रवाई होती रही है। जून 2026 में चार ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को सीज किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी, जबकि इससे पहले भी क्षेत्र में खनन विभाग की कार्रवाई की खबरें प्रकाशित हुई हैं।
प्रशासन के सामने कई सवाल
यदि मौके पर खनन की अनुमति नहीं है तो वहां से निकलने वाले वाहनों की जांच कौन कर रहा है? वाहनों के पास वैध रवन्ना और अन्य आवश्यक दस्तावेज हैं या नहीं? बिना नंबर प्लेट चल रहे वाहनों पर परिवहन विभाग की कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? और यदि खनिज वैध स्रोत से आ रहा है तो उसके स्रोत की जांच क्यों नहीं की जा रही?
इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
अज्ञात सूत्रों के अनुसार स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन, खनन विभाग और परिवहन विभाग संयुक्त रूप से अभियान चलाकर संबंधित क्षेत्रों में वाहनों और खनन स्थलों की जांच करें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि वर्तमान में किन क्षेत्रों में वैध खनन की अनुमति है और किन क्षेत्रों में खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है।
अब निगाह प्रशासन की कार्रवाई पर है। क्या कथित अवैध भू माफिया के द्वारा खनन के इस खेल की जांच होगी और सरकार के राजस्व कर की चोरी से हो रहे संभावित नुकसान का हिसाब सामने आएगा—यह आने वाला समय बताएगा।