आईटी पार्क क्षेत्र में हंगामा, वीजा-पासपोर्ट और कथित गतिविधियों की जांच की मांग; पुलिस ने महिलाओं को अपने संरक्षण में लिया
देहरादून। सोशल मीडिया पर वायरल बताए जा रहे एक वीडियो के बाद देहरादून के आईटी पार्क क्षेत्र में विदेशी महिलाओं की गतिविधियों को लेकर मामला चर्चा में आ गया है। वायरल वीडियो में कुछ विदेशी महिलाओं को लेकर कई तरह के आरोप और दावे किए जा रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद मौके पर मौजूद बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और महिलाओं को अपने संरक्षण में लेकर मामले की जानकारी जुटाई। कार्यकर्ताओं की ओर से महिलाओं के पासपोर्ट, वीजा और भारत में रहने की वैध अनुमति की जांच कराने की मांग की गई है।
कथित देह व्यापार को लेकर भी लगाए गए आरोप
वायरल वीडियो में विदेशी महिलाओं के खिलाफ कथित देह व्यापार जैसी गतिविधियों से जुड़े आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुलिस अथवा किसी अधिकृत एजेंसी की ओर से स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कुछ विदेशी महिलाओं के लिएस्थानीय स्तर पर कमरे और फ्लैट उपलब्ध कराए जा रहे हैं और इन स्थानों का कथित रूप से आपत्तिजनक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
खान बाबा उर्फ सागर का नाम भी चर्चा में
वीडियो से जुड़े दावों में खान बाबा उर्फ सागर, जिसे नोएडा निवासी बताया जा रहा है, का नाम भी सामने आया है। आरोप है कि वह विदेशी महिलाओं को कमरे अथवा फ्लैट उपलब्ध कराने में भूमिका निभाता है।
वायरल दावों में चार फ्लैटों का भी जिक्र किया गया है। इन फ्लैटों की कीमत करीब एक-एक करोड़ रुपये बताए जाने का दावा किया गया है। हालांकि, फ्लैटों के स्वामित्व, वास्तविक उपयोग और संबंधित व्यक्ति की भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दस्तावेजों और सीसीटीवी की जांच की मांग
मामले में कार्यकर्ताओं ने पुलिस से विदेशी महिलाओं के पासपोर्ट और वीजा के साथ-साथ उनके भारत में रहने के उद्देश्य और अनुमति की जांच कराने की मांग की है। जिन फ्लैटों का वीडियो में उल्लेख किया गया है, वहां के किरायानामे, मकान मालिकों की जानकारी और सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की मांग उठाई गई है।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि जांच में वीजा नियमों का उल्लंघन अथवा कोई गैरकानूनी गतिविधि सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
वायरल वीडियो की भी होगी जांच जरूरी
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में किए जा रहे दावों को लेकर यह भी जरूरी है कि वीडियो की तारीख, स्थान, उसमें दिखाई दे रहे लोगों की पहचान और वीडियो में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जाए। केवल वायरल वीडियो के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता।
फिलहाल पुलिस की ओर से महिलाओं के दस्तावेजों की जांच, उनकी वास्तविक स्थिति और मामले में किसी कानूनी कार्रवाई को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
