प्लास्टिक मुक्त उत्तराखंड बनाने की अपील, पर्यटकों से जिम्मेदारी निभाने को कहा मुख्यमंत्री धामी ने

देहरादून। उत्तराखंड को स्वच्छ, हरित और पर्यावरण के अनुकूल राज्य बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर राज्यवासियों और प्रदेश में आने वाले पर्यटकों से महत्वपूर्ण अपील की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और प्राकृतिक धरोहर है। इसकी स्वच्छता और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना सरकार के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक और पर्यटक की भी साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह बंद करने और पर्यावरण संरक्षण के अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड अपनी हिमालयी पर्वत श्रृंखलाओं, घने वनों, नदियों, झीलों और धार्मिक स्थलों के कारण पूरे देश और दुनिया में विशेष पहचान रखता है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा तथा अन्य धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों की यात्रा के लिए राज्य पहुंचते हैं। ऐसे में यदि प्लास्टिक कचरे का अनियंत्रित उपयोग होता है तो इसका सीधा प्रभाव पर्यावरण, जल स्रोतों और वन्यजीवों पर पड़ता है। यही कारण है कि राज्य सरकार लगातार प्लास्टिक मुक्त उत्तराखंड अभियान को आगे बढ़ा रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में सिंगल-यूज प्लास्टिक पर रोक लगाने, कचरा प्रबंधन को मजबूत बनाने और स्वच्छता अभियान को जनआंदोलन का रूप देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। नगर निकायों, ग्राम पंचायतों, स्कूलों, कॉलेजों और स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे, जब तक समाज का प्रत्येक वर्ग इस अभियान में अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाएगा।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से पर्यटकों से अपील करते हुए कहा कि वे पर्यटन स्थलों, धार्मिक धामों, ट्रैकिंग मार्गों और प्राकृतिक स्थलों पर प्लास्टिक की बोतलें, पॉलीथीन, चिप्स के पैकेट या अन्य कचरा इधर-उधर न फेंकें। उन्होंने कहा कि पर्यटक उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने आते हैं, इसलिए उनका भी यह नैतिक दायित्व बनता है कि वे यहां की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दें। उन्होंने लोगों से कपड़े या जूट के थैलों का उपयोग करने तथा पुनः उपयोग किए जा सकने वाले उत्पादों को अपनाने की अपील की।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वन विभाग, पर्यटन विभाग और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से प्लास्टिक मुक्त अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं। विभिन्न जिलों में जनजागरूकता कार्यक्रम, स्वच्छता अभियान, नुक्कड़ नाटक, रैलियां और विद्यालयों में प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है ताकि नई पीढ़ी को भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल आज की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाना नहीं, बल्कि लोगों की जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाना है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव अपनाए, जैसे कपड़े के बैग का उपयोग करना, प्लास्टिक की बोतलों के स्थान पर स्टील या कांच की बोतलों का इस्तेमाल करना और कचरे का उचित निस्तारण करना, तो पूरे प्रदेश में बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्यवासी, व्यापारी, होटल संचालक, पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोग और देश-विदेश से आने वाले पर्यटक इस अभियान में सरकार का पूरा सहयोग करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी के सामूहिक प्रयासों से उत्तराखंड को स्वच्छ, सुंदर, हरित और प्लास्टिक मुक्त राज्य बनाया जा सकता है। उन्होंने सभी नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने और प्रकृति की इस अनमोल धरोहर को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने का आह्वान किया।

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