यूके हाईटेक नर्सरी संचालक अनिल रावत को बड़ी राहत, कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में 600 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का मामला किया खारिज

सीबीआई जांच के बाद दाखिल अंतिम रिपोर्ट पर कोर्ट का फैसला, अनिल रावत बोले— “सच्चाई की जीत हुई, न्यायपालिका पर था पूरा विश्वास”
विकासनगर। यूके हाईटेक नर्सरी के संचालक अनिल रावत को कथित 600 करोड़ रुपये के घोटाले से जुड़े मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। कोर्ट ने मामले में पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर प्रकरण को खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद अनिल रावत ने इसे सत्य और न्याय की जीत बताते हुए न्यायपालिका का आभार व्यक्त किया।
यह मामला उत्तराखंड हाईकोर्ट के निर्देश पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपा गया था। जांच के दौरान उद्यान विभाग के तत्कालीन निदेशक हरविंदर सिंह बवेजा, मुख्य उद्यान अधिकारी मीनाक्षी जोशी और उद्यान प्रभारी सचल दल इंद्रमणि भूषण सहित अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की गई थी। आरोप था कि नियमों की अनदेखी करते हुए यूके हाईटेक नर्सरी को विभिन्न कार्य आवंटित किए गए।
सीबीआई द्वारा विस्तृत विवेचना पूरी किए जाने के बाद न्यायालय में अंतिम रिपोर्ट (फाइनल रिपोर्ट) प्रस्तुत की गई। रिपोर्ट में अभियोजन के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाए गए, जिसके आधार पर कोर्ट ने पूरे मामले को साक्ष्य के अभाव में खारिज कर दिया।
फैसले के बाद अनिल रावत ने कहा कि उन पर 600 करोड़ रुपये के घोटाले और किसानों को बीमार सेब के पौधे वितरित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे, लेकिन जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद सभी आरोप टिक नहीं सके। उन्होंने कहा कि आज भी क्षेत्र के अनेक किसानों के बागों में उन्हीं की नर्सरी से लगाए गए सेब के पौधे स्वस्थ अवस्था में फल-फूल रहे हैं, जो उनके कार्य की गुणवत्ता का प्रमाण हैं।
अनिल रावत ने कहा कि उन्हें शुरू से ही न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। उन्होंने कोर्ट के साथ-साथ अपने आराध्य महासू महाराज का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अंततः सत्य की जीत हुई और उन्हें न्याय मिला।
इस फैसले के बाद उद्यान विभाग से जुड़े इस चर्चित मामले पर लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया है। वहीं, इस निर्णय के बाद क्षेत्र में भी इस मामले को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
“कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में पूरे मामले को खारिज कर दिया है। सीबीआई जांच में भी आरोप सिद्ध नहीं हुए। अनिल रावत ने इसे सत्य और न्याय की जीत बताते हुए कहा कि उन्हें शुरू से न्यायपालिका पर विश्वास था।”

रिपोर्ट:- सविता रानी